अशक्त बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार पर केंद्र को नोटिस 


       नयी दिल्ली।  दिल्ली उच्च न्यायालय ने अशक्त बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिये दायर  याचिका पर आज  केंद्र को नोटिस जारी किया।  
       कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की  पीठ ने केंद्र और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को नोटिस जारी कर उन्हें चार हफ्त के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, इस मामले को अगले साल छह मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया।  
        यह याचिका  विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी  ने दायर की है। इसने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र अशक्त जन अधिकार कंवेंशन का अनुमोदन करने के नाते देश में सभी स्कूलों में समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाना एक दायित्व है।दरअसल, समावेशी शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें अशक्त या गैर अशक्त छात्र साथ में शिक्षा हासिल करते हैं और शिक्षण एवं सीखने की पण्राली उपयुक्त रूप से अनुकूल होती है। याचिका में कहा गया है कि अशक्त बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिये सरकार का यह दायित्व बनाता है कि वह सुनिश्चित करे कि स्कूल विभिन्न तरह के अशक्त बच्चों के सीखने की जरूरत को पूरा करने के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया करे।
        गौरतलब है कि समावेशी शिक्षा के सिद्धांत को संयुक्त राष्ट्र ने 2006 में स्वीकार किया  था।