खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में रोजगार के बढ़ते अवसर

       (अशोक सिंह ) 
नयी दिल्ली।  बदलते समय के साथ ही दुनिया भर में लोगों की खानपान संबंधी आदतों में भी बदलाव आ रहा है जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण है लाइफ स्टाइल में हो रहा ते परिवर्तन। शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में खासतौर पर ऐसे बदलाव स्पष्ट तौर पर दिखाई पड़ते हैं।
       नौकरी के लिए सुबह-शाम की भागमभाग, ट्रैफिक और तमाम तरह की अन्य आपाधापी से भरी दिनचर्या के बीच किसे फुर्सत है कि ता खाना तसल्ली से रोजाना बनाया और खाया जाये। इसका समाधान इंस्टेंट एवं प्रोसेस्ड अथवा रेडी टू ईट पैक्ड फ़ूड के रूप में देश-विदेश में देखा जा सकता है। पहले खानपान की ऐसी आदतें सिर्फ पश्चिमी देशों तक ही सीमित थीं पर आज भारत जैसे विकासशील देशों में भी बड़े पैमाने पर यह प्रचलन आम होता जा रहा है।
       इसी बदलाव का नतीजा है कि वैश्विक स्तर पर प्रोसेस्ड फ़ूड इंडस्ट्री का कारोबार दिन दोगुनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। बच्चों में ऐसे खाने का क्रेज तो जैसे सर पर जादू की तरह चढ़ गया है। घर में बने खाने को देखकर आज के इन बच्चों की मानों त्योरियां ही चढ़ जाती हैं और अंत में अभिभावकों को उनका मनपसंद फास्ट फ़ूड/जंक फ़ूड /डिब्बाबंद खाद्याहार मंगवाना ही पड़ता है।
       फ़ूड टेक्नोलोजी का महत्व,- खानपान की बदलती आदतों के कारण फ़ूड टेक्नोलोजी विशेषज्ञों की मांग बहुत तेी से देश-विदेश में बढ़ रही है। इनका काम न सिर्फ ऐसे प्रोसेस्ड आहारों की नई किस्मों का विकास करना है बल्कि आम जनता के स्वाद के अनुसार इनमें समय-समय पर बदलाव करना भी है। डिब्बाबंद प्रसंस्करित आहार (प्रोसेस्ड फ़ूड) तैयार करने वाली कम्पनियों का नेटवर्क आज एक देश तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में कार्यरत नेस्ले, कैडबरी, ब्रिटेनिया, ¨हदुस्तान लीवर सरीखी मल्टी नेशनल कम्पनियां वैश्विक स्तर पर छायी हुयी हैं।  शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ पर इनके प्रोडक्ट्स नहीं खरीदे जाते हैं।
       देश में फ़ूड टेक्नोलोजिस्ट की बढ़ती मांग;- कृषि प्रधान देश और यहाँ पर विविधतापूर्ण जलवायु होने के कारण देश में लगभग हर तरह के खाद्यान्न ,फल ,सब्जी और फूल का उत्पादन होता है। दूध उत्पादन में वि में अव्वल स्थान पर तथा फल एवं सब्जी उत्पादन में विश्व के शीर्ष देशों में होने के कारण भारत में काफी मा में ऐसे कृषि उत्पादों की उपलब्धता है। 
        शीत भण्डारण सुविधाओं तथा प्रसंस्करण संयत्रों के अभाव के कारण यहाँ पर बड़ी मात्रा में फलों और सब्जियों का नुकसान हर साल होता है। एक मोटे अनुमान के अनुसार यह मात्र कुल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत तक है। अगर सही समय पर इनका प्रसंस्करण हो जाए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी आमदनी इससे मिल सकती है।
      फ़ूड टेक्नोलोजी ट्रेनिंग;-बी ई (फ़ूड टेक्नोलोजी),बी एस सी(फ़ूड टेक्नोलोजी),बी एस सी(फ़ूड साइंस एंड क्वालिटी कंट्रोल) आदि ग्रेजुएशन स्तर के कोर्स और इन्हीं विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेस देश के विविद्यालयों में आज संचालित किये जाते हैं। प्राय: साइंस पृष्ठभूमि वाले युवाओं को ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर इनमें स्थान मिल पाता है।         
         सेन्ट्रल फ़ूड टेक्नोलोजी एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट(मैसूर) का नाम इनमें सर्वाधिक उल्लेखनीय है।
       रोजगार संभावनाएं,- इस तरह की विशिष्ट ट्रेनिंग लेने के बाद फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, मिल्क प्रोसेसिंग इकाइयों, डिस्टिलरी, फ्रूट जूस कंपनियों में रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा इस तरह की ट्रेनिंग देने वाले संस्थानों में भी रोगार हासिल कर सकते हैं। यही नहीं थोड़ी बहुत पूँजी लगाकर स्व रोजगार के अवसरों की भी तलाशा जा सकता है।

साभार वार्ता